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विशेष-लेख : ‘गढ़बो नवा छत्तीसगढ़’ में महिलाओं की सशक्त भागीदारी

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छत्तीसगढ़ में महिलाओं ने जहां राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई है, वहीं बुनियादी स्तर पर विकास में अपनी सशक्त हिस्सेदारी निभा रही हैं। पंचायतों में 50 फीसदी हिस्सेदारी के साथ सहभागिता हो या आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका, पर्यवेक्षक, सुपोषण मित्र, मितानिन, शिक्षिका या स्व-सहायता समूह के रूप में महिलाएं प्रदेश़ की नींव मजबूत करने में महत्वपूर्ण भागीदार रहीं हैं। वास्तव में आधी आबादी कही जाने वाली महिलाएं राज्य की आधार स्तंभ हैं,जिनके बिना विकास की कल्पना नहीं की जा सकती।
    घर-परिवार की देखभाल के साथ अब प्रदेश की महिलाएं पंचायतों, विधानसभा के साथ संसद तक में अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कर रही हैं। कला, खेल, राजनीति कोई भी क्षेत्र हो यहां की महिलाओं ने हर क्षेत्र में नये आयाम स्थापित किये हैं। इनमें से श्रीमती तीजनबाई, श्रीमती ममता चंद्राकर, श्रीमती फूलबासन यादव, सुश्री नीता डूमरे जैसे नाम से हर कोई वाकिफ है। इनके अतिरिक्त कई ऐसी महिलाएं और महिला समूह हैं,जो राज्य की सामाजिक, आर्थिक विकास की महत्वपूर्ण धुरी हैं। स्व-सहायता समूह से जुड़कर प्रदेश की महिलाओं ने आर्थिक सशक्तिकरण का एक मजबूत ताना-बाना बुना है जो एक मिसाल है। पारिवारिक जिम्मेदारी निभाने के साथ ये महिलाएं गौठानों में काम करती हैं, गोबर के दिए, गमले, जैविक खाद से लेकर आयुर्वेदिक औषधी भी तैयार कर रही हैं।
     खेती-किसानी के कार्यों में यहां की महिलाएं निपूर्ण हैं ही, पर अब यहां की हजारों महिलाएं सफलतापूर्वक खुद का व्यवसाय कर रही हैं। प्रदेश में राशन दुकान, कपड़ा दुकान, सिलाई दुकान, श्रृंगार दुकान, होटल, थोक में बड़ी, पापड़, अचार और छत्तीसगढ़ी व्यंजनों की बिक्री तथा ब्यूटी पार्लर जैसे लाभकारी व्यवसाय उनकेे लिए आत्मनिर्भरता की सीढ़ी बन चुके हैं। छत्तीसगढ़ में शासकीय उचित मूल्य की दुकानों के संचालन, आंगनबाड़ी केन्द्रों के लिए पूरक पोषण आहार और स्कूलों में मध्यान्ह भोजन तैयार करने का सौ फीसदी कार्य भी महिलाओं को ही दिया गया है। प्रदेश के करीब 45 हजार आंगनबाड़ी केन्द्रों और 5 हजार मिनी आंगनबाड़ी केन्द्रों में महिला स्व सहायता समूह रेडी-टू-इट फूड बना रही हैं। इन केन्द्रों में बच्चों के लिए नाश्ता और गर्म पके हुए भोजन तैयार करने का काम भी महिला समूह की महिलाएं कर रही हैं। कुपोषण मुक्ति अभियान में महिलाओं कार्यकर्ताआ की सक्रियता से ही आज राज्य में कुपोषण दर में लगातार कमी आ रही है।
    महिलाओं की महत्वपूर्ण भागीदारी को समझते हुए प्रदेश के मुखिया श्री भूपेश बघेल ने महिलाओं के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिये हैं। प्रदेश में 15 से 49 वर्ष की 41.50 प्रतिशत महिलाओं के एनीमिया से ग्रसित आंकड़ों को दखते हुए प्रदेश में मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान प्रारंभ किया गया है,इसके तहत महिलाओं से कुपोषण दूर करने के लिए गर्म पौष्टिक भोजन के साथ स्थानीय पौष्टिक आहार दिया जा रहा है। इसके अतिरिक्त गर्भवती और शिशुवती महिलाओं की स्वास्थ्य जांच, टीकाकरण, पूरक पोषण आहार की व्यवस्था की गई है। टेक होम राशन के अंतर्गत गर्भवती और शिशुवती माताओं को रेडी-टू-ईट फूड दिया जा रहा हैं जिसमें रागी व मूगफली का समावेश रहता है। महतारी जतन योजना के तहत गर्भवती महिलाओं को आंगनवाड़ियों के माध्यम से अलग अलग मेन्यू अनुसार गर्म भोजन प्रदान किया जा रहा है। बेटियों के सम्मानपूर्वक विवाह के लिए संचालित मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना अंतर्गत प्रति जोड़ा अनुदान राशि 15 हजार से बढ़ाकर 25 हजार कर दिया गया है, इसमें 20 हजार तक का दैनिक उपयोग का सामान नव वधु को आगामी सुखमय गृहस्ती के लिए दिया जाता है। योजना के तहत हजारों बेटियों का विवाह कराया गया है। मातृ वंदना योजना के तहत गर्भवती धात्री महिलाओं को प्रथम जीवित संतान के लिए तीन किश्तों में 5 हजार रूपए का भुगतान किया जा रहा है जिससे उसे आर्थिक या सामाजिक तंगी के कारण गर्भावस्था के अंतिम दिनों तक आजीविका के लिए काम न करना पड़े। मैदानी स्तर पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, मिनी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और आंगनबाड़ी सहायिकाओं के महत्व और योगदान को देखते हुए उनके मानदेय में 1 जुलाई 2019 से वृद्धि की गयी है। कामकाजी महिलाओं के लिए पांच नये वसति गृहों की स्वीकृति देते हुए बजट में प्रावधान किया गया है।
    महिलाओं की सामाजिक, आर्थिक व पोषण की स्थिति में सुधार लाने, उनके संवैधानिक हितों की रक्षा और उन्हें योजनाओं का लाभ उठाने के लिए सक्षम तथा जागरूक बनाने की दिशा में कई कार्य किये जा रहे हैं। राज्य सरकार ने आदिवासी समाज में मातृ-शक्ति को और सशक्त बनाने के लिए वनोपजों के कारोबार से महिला समूहों की 50 हजार से अधिक सदस्याओं को जोड़ने का फैसला लिया है। राज्य के 11 जिलों में ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण और जागरूकता के लिए महिला शक्ति केन्द्रों का संचालन किया जा रहा है, इससे 4 हजार 500 से अधिक छात्र जुड़े हैं। महिला पुलिस स्वयं सेवा चेतना योजना के तहत प्रदेश के दुर्ग और कोरिया जिले में 4 हजार 568 महिला स्वयं सेविका समाज और पुलिस के बीच जेण्डर आधारित मुद्दों पर एक सेतु के रूप में कार्यरत हैं। शुचिता योजना के माध्यम से स्कूलों और महाविद्यालयों में स्वच्छता के प्रति जागरूक करते हुए सेनिटरी पैड उपलब्ध कराए गए हैं। नोनी सुरक्षा योजना के तहत समाज में बालिकाओं के प्रति सकारात्मक सोच लाने की कोशिश की जा रही है। इसके तहत 18 वर्ष पूरा होने या 12 तक की पढ़ाई होने पर परिपक्वता राशि 1 लाख रूपए देने का प्रावधान है।
    छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था में महिलाओं की बराबर हिस्सेदारी रही है। छत्तीसगढ़ महिला कोष की ऋण योजना और सक्षम योजना भी राज्य की महिलाओं को सक्षम बनाने सफल रही है। महिला कोष के माध्यम से स्वसहायता समूहों और जरूरतमंद महिलाओं को ऋण उपलब्ध करवाकर आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जा रहा है। महिलाओं के कौशल विकास और आर्थिक आत्मनिर्भरता के लिए स्वालंबन और सक्षम योजनाएं चलाई जा रही हैं। महिला कोष की ऋण योजना में महिला समूहों को केवल तीन प्रतिशत की ब्याज दर पर कारोबार के लिए दो लाख रूपए तक का ऋण दिया जा रहा है। करीब 35 हजार महिला समूहों को इस योजना का लाभ मिल चुका है, जबकि सक्षम योजना के तहत विधवा, तलाकशुदा और 35 से 45 वर्ष आयु की अविवाहित महिलाओं को आसान शर्तों पर व्यवसाय के लिए ऋण दिया जा रहा है। इस योजना में करीब ढाई हजार महिलाएं स्वालंबन की राह पकड़ चुकी हैं। यहां की महिलाएं राज्य प्रशासनिक सेवाओं सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में भी सफलता हासिल कर अपनी काबिलियत का लोहा मनवा रही हैं।
    राज्य में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के प्रति सजग रहते हुए महिलाओं का कार्यस्थल पर लैगिंक उत्पीड़न (निवारण प्रतिषेध और प्रतितोष) अधिनियम 2013, लैंगिक अपराधों से बच्चों के संरक्षण कानून, घरेलू हिंसा से महिलाओं के संरक्षण कानून और छत्तीसगढ़ टोनही प्रताड़ना निवारण अधिनियम-2005 लागू हैं। महिलाओं और बालिकाओं की आपातकालीन सहायता के लिए प्रदेश में महिला हेल्पलाइन-181 की सेवा संचालित है। पीड़ित महिलाओं की सहायता के लिए प्रदेश के 27 जिलों में सखी सेंटर संचालित हैं जहां एक ही जगह पर सभी आवश्यक सुविधाएं दी जा रही है। प्रदेश में महिलाएं अपनी मेहनत और योग्यता के बल पर आगे बढ़ रही हैं, जिसमें राज्य शासन भी आगे बढ़ कर हर सहयोग करने को तत्पर है। आज जरूरत है समाज भी पुरानी रूढ़ीवादी मानसिकता से बाहर आकर महिलाओं को बराबर भागीदारी की राह उपलब्ध कराए। जिससे अधिक से अधिक महिलाएं समाज के साथ देश-प्रदश के विकास में हिस्सेदार बन सकें।

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