डोंगरगांव छत्तीसगढ़ में सरकार बदलने के बाद शराब दुकानों के समीप चखना दुकानों सहित अतिक्रमण की त्वरित कार्रवाई कर प्रशासन ने शासन की नजरों में अपनी छवि सुधारने की कोशिश जरूर की है किन्तु गांव-गांव और नगर में अवैध शराब की बिक्री में कोई कमी नहीं आई है। इन सबके पीछे आबकारी विभाग और शराब दुकानों में प्लेसमेंट के कर्मचारियों की मिलीभगत है। दुकानों में कार्यरत कर्मचारी दुकानों से सप्लाई करने के लिए बकायदा सप्लायर नियुक्तकर रखा है, जिनके माध्यम से गांव-गांव में शराब की सप्लाई की जा रही है। शराब विक्रय को लेकर चुनाव के दौरान ग्रामीण महिलाओं में काफी आक्रोश देखा गया था और सरकार बदलने के बाद यह उम्मीद की जा रही थी कि गांव-गांव, गली-गली कोचियों के माध्यम से बिक रहे शराब में कुछ हद तक लगाम लगेगा। जानकारों की मानें तो डोंगरगांव शहर और अर्जुनी में मदिरा दुकानों में खुदरा विक्रय का आंकड़ा कोचियों को दिए जाने वाले थोक माल की तुलना में काफी कम है। ग्रामीण क्षेत्रों के हर गली में शराब उपलब्ध कराने के लिए शराब माफियाओं ने पूरे क्षेत्र में नेटवर्क बिछा रखा है और अधिकारियों के नाक के नीचे पूरा गोरखधंधा चल रहा है।
ऐसा नहीं है कि यह पूरा कारोबार अधिकारियों की जानकारी में नहीं है। अवैध शराब विक्रय का खेल पूर्व कांग्रेस सरकार के बाद अब भाजपा सरकार में भी बदस्तूर जारी है। जानकारी के अनुसार केवल राजनांदगांव जिले में देशी मदिरा के 18 तथा विदेशी मदिरा के 23 दुकान शासन द्वारा संचालित हैं लेकिन इससे कई गुना इन दुकानों से कोचिए जुड़े हुए हैं जो कि आसानी से इन दुकानों से माल लेकर खुलेआम ग्रामीण क्षेत्रों में शराब सप्लाई करते हैं। अकेले डोंगरगांव मदिरा दुकान में अनेक सप्लायर सक्रिय हैं, जो ग्रामीण क्षेत्रों में कोचियों को माल पहुंचाते हैं, जो कि मदिरा प्रेमियों को दोगुने दाम में शराब को विक्रय करते हैं। डोंगरगांव के आसपास के ग्रामों के साथ ही दूरस्थ अंचल के ग्रामों में भी मदिरा प्रेमियों के लिए शराब आसानी से उपलब्ध है, जिसे मनमाने दामों में बेचा जा रहा है। इधर ग्रामीण क्षेत्रों में आसानी से शराब उपलब्ध होने की वजह से महिलाओं और बच्चों में इसका सीधा असर हो रहा है। बच्चों से लेकर बूढ़ों तक आसानी से उपलब्ध होने वाली शराब क्षेत्र में बढ़ रही दुर्घटनाओं का भी एक बड़ा कारण है।






