March 17, 2026

महासमुन्द जिला

महासमुंद। महासमुंद जिले के तुमगांव में कुछ ही दिन पहले सेक्स रैकेट के भांडाफोड़ के बाद अब...
महासमुंद. महासमुंद में एक बार फिर अंतर्राज्यीय गांजा तस्करी का पर्दाफाश हुआ है. कोमाखान पुलिस ने टेमरी...
रायपुर. गोबर खरीदी कम होने पर उप संचालक ने कृषि विकास अधिकारी को कारण बताओ नोटिस भेजा है....
महासमुंद,राष्ट्रीय जैविक स्ट्रेस प्रबंधन संस्थान, रायपुर एवं कृषि विज्ञान केन्द्र, महासमुन्द के संयुक्त तत्वाधान में बायोटेक किसान परियोजना का संचालन कोविड-19 के प्रावधानों का पालन करते हुए जिले में शुरू किया गया है। कृषि विज्ञान केन्द्र, महासमुन्द द्वारा कृषि कार्य को उत्कृष्ट बनाने और किसानों की आर्थिक स्थिति को सबल बनाने की पहल की जा रही है। इसके तहत् किसानों को प्रभावशील ढंग से किसानी कार्य करने के लिए प्रशिक्षण एवं तकनीकी जानकारी दी जा रही है। इसके साथ ही किसानों की समस्याओं का समाधान भी कृषि वैज्ञानिकों द्वारा किया जा रहा है। राष्ट्रीय जैविक स्ट्रेस प्रबंधन संस्थान, बरोंडा, रायपुर द्वारा कृषि विज्ञान केन्द्र, में डीबीटी बायोटेक किसान परियोजना का संचालन डॉ. एस. के. वर्मा, वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख, कृषि विज्ञान केन्द्र, महासमुन्द के मार्गदर्शन में किया जा रहा है। इस परियोजना में कृषि विज्ञान केन्द्र द्वारा जिले के महासमुन्द ब्लॉक में पांच गांव का चयन किया गया है। इसमें साराडीह, बिरकोनी, बरबसपुर, परसवानी एवं अछोला शामिल है। इन पांचों ग्रामों के पचास किसानों का चयन कर इन्हें उन्नत खेती के लिए प्रशिक्षण व तकनीकि जानकारी प्रदान किया जा रहा है।कृषि विज्ञान केन्द्र महासमुंद के अधिकारियों ने बताया कि इस परियोजना में धान की जिंको राइस किस्म किसानों को उपलब्ध कराई जा रही है, जिसमें जिंक की प्रचुर मात्रा (26-28 पी.पी.एम.) उपस्थित है, जबकि अन्य किस्मों में जिंक बहुत कम मात्रा (15 पी.पी.एम.) तक पाई जाती है साथ ही किसानों को धान फसल की मेंढ़ पर लगाने के लिए अरहर बीज एवं धान फसल हेतु खरपतवार नाशक भी उपलब्ध कराए जा रहे है। जिंक मानव शरीर में प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है, जिससे मानव शरीर अनेक प्रकार के संक्रमण से बच सकता है। जिंक की उचित मात्रा का सेवन करने से मौसमी बुखार, सर्दी, खाँसी आदि संक्रमण से बचा जा सकता है। यह किस्म 125-130 दिन में पक जाती है तथा प्रति हेक्टेयर 50 से 55 क्विंटल उपज देती है। इस किस्म के धान को लगाने से किसानों को प्रति एकड़ 50 से 60 हजार रूपए. तक शुद्ध लाभ हो सकता है। किसानों को जैविक तरीके से बीजोपचार स्यूडोमोनास-फ्यरोसेंस द्वारा बताया एवं कराया गया है। चयनित ग्रामों में निरंतर कृषि वैज्ञानिकों द्वारा निरीक्षण कर किसानों को खेती में होने वाली समस्याओं का निराकरण किया जा रहा है। परियोजना के अंतर्गत किसानों को धान की बुवाई जानकारी से अवगत कराया जा रहा है साथ ही चयनित ग्राम के किसानों को एकीकृत कृषि प्रणाली जैसे फसल उत्पादन के साथ बागवानी एवं मशरूम उत्पादन के लिए प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिससे किसानों की आय में वृद्धि होगी। कृषि विज्ञान केंद्र, महासमुंद के कृषि वैज्ञानिक  एच. एस. तोमर, श्री कुणाल चन्द्राकर, श्री साकेत दुबे, इंजीनियर रवीश केशरी, कमलकांत लोधी एवं डॉ. देवेंद्र कुमार साहू द्वारा परियोजना का संचालन डॉ. एस. के. वर्मा, वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख के नेतृत्व में किया जा रहा है।
महासमुंद – जिले के कृषक पारम्परिक खेती को कम कर नए तरीके से साग-सब्जी की खेती करना शुरु कर...
महासमुंद- जिला चिकित्सालय और कोविड केयर सेंटर में नए प्रारूप के तहत किए जा रहे आमूल-चूल परिवर्तनों में जिला स्तरीय अफसरों के अलावा राज्य स्तर के आला अधिकारी भी विशेष रुचि ले रहे हैं 12 जून 2020 को राज्य स्तरीय उच्चाधिकारियों के चार सदस्यीय टीम मे राज्य कार्यक्रम प्रबंधक डाॅ प्रदीप टण्डन और राज्य सलाहकार डाॅ रणवीर बघेल सहित दो अन्य उच्च स्तरीय विशेषज्ञों ने जिला चिकित्सालय के कोविड और नाॅन कोविड सेक्शन में किए जा रहे बदलावों का आंकलन किया। उन्होने यहा किए जा रहे कार्य की प्रगति को देखकर सराहना करते हुए आवश्यक  दिशा-निर्देश भी जारी किए। इस दौरान उन्होंने जिला चिकित्सालय के कोविड सेक्शन से शुरूआत की और बारी-बारी सभी कक्षों में भ्रमण किया। सेंट्रल ऑक्सीजन की पाइप लाइन देखी एवं बनाए जा रहे पार्टीशन चैम्बर्स की व्यवस्था में प्रयोग में लाई जा रही नई तकनीक की सराहना भी की। डाॅनिंग और डाॅफिंग क्षेत्र में हुए निर्माण का नक्शा परखा और नहाने के साथ-साथ पीपीई किट बदलने एवं सैनिटाइज्ड होने की जगह का माप लेकर प्रक्रिया के दौरान बरती जाने वाली सावधानी के बारे में अद्यतन जानकारी दी। इसके बाद नाॅन-कोविड सेक्शन के लिए भी ओपीडी एवं आईपीडी में प्रदान की जा रही स्वास्थ्य सुविधाओं का मूल्यांकन किया। उन्होने कहा कि किसी भी स्थिति में कोविड और नाॅन-कोविड मरीजों के सम्पर्क नही होनी चाहिए  । जिस पर सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक डाॅ आरके परदल ने उन्हें बताया कि कलेक्टर श्री कार्तिकेया गोयल के निर्देशन और मुख्य कार्यपालन अधिकारी डाॅ रवि मित्तल के मार्गदर्शन में बन रहे इस माॅडल को कई अनुभवी सलाहकारों द्वारा परखा जा चुका है, साथ ही स्वास्थ्य विभाग सहित ग्रामीण यांत्रिकी सेवा, लोक निर्माण एवं  जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की देख-रेख में कार्यो मे दक्ष और जानकार मिस्त्रियों से काम लिया जा रहा है। इससे आंतरिक परिसर में संक्रमण फैलाव की आशंका नही के बराबर है। इस दौरान टीम के साथ जिला कार्यक्रम प्रबंधक  संदीप ताम्रकार, अस्पताल सलाहकार डाॅ निखिल गोस्वामी और जिला कार्यक्रम समन्वयक  उत्तम श्रीवास सहित अन्य विभागीयअधिकारी उपस्थितजिला चिकित्सालय और कोविड केयर सेंटर में नए प्रारूप के तहत किए जा रहे आमूल-चूल परिवर्तनों में जिला स्तरीय अफसरों के अलावा राज्य स्तर के आला अधिकारी भी विशेष रुचि ले रहे हैं। 12 जून 2020 को राज्य स्तरीय उच्चाधिकारियों के चार सदस्यीय टीम मे राज्य कार्यक्रम प्रबंधक डाॅ प्रदीप टण्डन और राज्य सलाहकार डाॅ रणवीर बघेल सहित दो अन्य उच्च स्तरीय विशेषज्ञों ने जिला चिकित्सालय के कोविड और नाॅन कोविड सेक्शन में किए जा रहे बदलावों का आंकलन किया। उन्होने यहा किए जा रहे कार्य की प्रगति को देखकर सराहना करते हुए आवश्यक  दिशा-निर्देश भी जारी किए। इस दौरान उन्होंने जिला चिकित्सालय के कोविड सेक्शन से शुरूआत की और बारी-बारी सभी कक्षों में भ्रमण किया। सेंट्रल ऑक्सीजन की पाइप लाइन देखी एवं बनाए जा रहे पार्टीशन चैम्बर्स की व्यवस्था में प्रयोग में लाई जा रही नई तकनीक की सराहना भी की। डाॅनिंग और डाॅफिंग क्षेत्र में हुए निर्माण का नक्शा परखा और नहाने के साथ-साथ पीपीई किट बदलने एवं सैनिटाइज्ड होने की जगह का माप लेकर प्रक्रिया के दौरान बरती जाने वाली सावधानी के बारे में अद्यतन जानकारी दी। इसके बाद नाॅन-कोविड सेक्शन के लिए भी ओपीडी एवं आईपीडी में प्रदान की जा रही स्वास्थ्य सुविधाओं का मूल्यांकन किया। उन्होने कहा कि किसी भी स्थिति में कोविड और नाॅन-कोविड मरीजों के सम्पर्क नही होनी चाहिए  । जिस पर सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक डाॅ आरके परदल ने उन्हें बताया कि कलेक्टर श्री कार्तिकेया गोयल के निर्देशन और मुख्य कार्यपालन अधिकारी डाॅ रवि मित्तल के मार्गदर्शन में बन रहे इस माॅडल को कई अनुभवी सलाहकारों द्वारा परखा जा चुका है, साथ ही स्वास्थ्य विभाग सहित ग्रामीण यांत्रिकी सेवा, लोक निर्माण एवं  जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की देख-रेख में कार्यो मे दक्ष और जानकार मिस्त्रियों से काम लिया जा रहा है। इससे आंतरिक परिसर में संक्रमण फैलाव की आशंका नही के बराबर है। इस दौरान टीम के साथ जिला कार्यक्रम प्रबंधक  संदीप ताम्रकार, अस्पताल सलाहकार डाॅ निखिल गोस्वामी और जिला कार्यक्रम समन्वयक  उत्तम श्रीवास सहित अन्य विभागीयअधिकारी उपस्थित थे। थे।
महासमुंद. छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में तुमगांव थाना क्षेत्र के नेशनल हाइवे 53 पर शुक्रवार सुबह करीब 4...