May 4, 2026

गरियाबंद जिला

गरियाबंद 25 जून 2022 छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड गरियाबंद के कार्यपालन अभियंता पी.के. साहू ने...
लिपकीय अनियमितता के कारण दुकान संचालक को नोटिस गरियाबंद 25 जून 2022 जिले के फिंगेश्वर विकासखण्ड के जेंजरा...
गरियाबंद 25 जून 2022 कलेक्टर प्रभात मलिक ने विगत 24 जून शुक्रवार को जिले के विकासखण्ड छुरा...
गरियाबंद 20 जून 2022 गरियाबंद जिले के अंतर्गत विभिन्न प्रकार के माध्यमों/सोशल मीडिया जिसमें फेसबुक, वाट्सएप, ट्विटर...
अधिकारी सौपे गये दायित्वों का निर्वहन करे – श्रीमती रोक्तिमा यादवगरियाबंद 20 जून 2022 अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस...
आयुष्मान कार्ड बनाने में तेजी लायेडॉक्टरों को केवल जेनेरिक मेडिसिन लिखने के निर्देशबूस्टर डोज के लिए लोगों...
पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री टी.एस. सिंहदेव ने ली समीक्षा बैठकगौठानों में वृहद वृक्षारोपण करेंसड़कों की...
गरियाबंद 06 जून 2022 गरियाबंद जिले के नवपदस्थ कलेक्टर श्री प्रभात मलिक ने आज पूर्वान्ह में जिला...
गरियाबंद 20 मई 2022 अनुविभागीय अधिकारी (रा.) राजिम श्अविनाश भोई ने मां गायत्री महिला स्व. सहायता समूह...
गरियाबंद -समूह की ताकत,एकता और दृढ़ विश्वास से जीवन को बदला जा सकता है। जो कार्य अकेले में असंभव जान पड़ता है उसे समूह के समर्थन और मार्गदर्शन से ही संभव बनाया जा सकता है। मजदूरी और अपने घर में काम करने वाली महिलाओं के लिए ज्यादा दूर की सोचना इसलिए भी संभव नहीं हो पाता, क्योंकि उनके पास संबल देने वाला कोई नहीं होता। जिले के छुरा विकासखंड अंतर्गत ग्राम लोहझर की तोरण बाई चक्रधारी के साथ भी ऐसे ही कुछ हो रहा था। तभी उन्हें बिहान से जुड़ने का अवसर मिला। पूजा एकता स्वयं सहायता समूह से जुड़कर उनका मनोबल ऊंचा हुआ। पहले केवल घर का चैका-बर्तन और बाहर मजदूरी को ही अपनी दुनिया मानकर चली थी। उन्हें अपने भीतर छुपे हुनर का अंदाजा नहीं था। घर में पति युवराज चक्रधारी मिट्टी से परंपरागत बर्तन, मूर्ति और अन्य सजावटी वस्तुएं बनाते थे। तोरण केवल समय-समय पर हाथ बटाती थी। समूह में आने-जाने से उनकी अंदर की प्रतिभा उभर कर सामने आयी। गरीबी के कारण पति के इस कला को पहचान नहीं मिल पा रही थी। तभी समूह से 30 हजार रूपये का ऋण लेकर इस कला को आगे बढ़ाया। बाजार और सीजन के मांग के अनुरूप मिट्टी के कलात्मक वस्तुएं बनाना प्रारंभ किया और इसमें स्वयं तोरण बाई ने हाथ बटाया। आज पिछले 02 वर्षो से मिट्टी के बर्तन और मूर्ति की बिक्री से इनके आर्थिक स्थिति में काफी सुधार आया है। गर्मी के मौसम में मटका बेचकर 15-20 हजार रूपये का आय होता है। वहीं त्यौहार के मौसम में मूर्ति बनाकर भी 35-40 हजार रूपये का आय हो जाता है। अभी गणेश मूर्ति विक्रय हेतु छुरा में स्टाल भी लगाए हैं। जिससे अच्छी बिक्री की उम्मीद है। तोरण बाई बताती है कि वे समूह में आजीविका के साथ बचत करना भी सीख गई है। अब वे पेंट मशीन लेने की सोंच रहे है। इसे भी समूह के माध्यम से लूंगी। आय से उनके समृद्धि के द्वार खुल गए है। अब समूह में माताजी और बहू को भी जुड़ गये हैं। छुरा जनपद के सीईओ रूचि शर्मा ने बताया कि तोरण बाई को प्रशिक्षण देकर उसके कला में और निखार लाया जायेगा। बिहान के डी.पी.एम रमेश वर्मा बताते है कि उनके बनाये गए मिट्टी के वस्तुओं को और अधिक कलात्मक बनाकर बड़ा बाजार उपलब्ध कराने के लिए प्रयास किया जा रहा है।
गरियाबंद-वीडियो कान्फ्रेसिंग के माध्यम से वृद्धाश्रम में रह रहे वृद्धजनों का मुख्यमंत्री ने हाल जानागरियाबंद 09 जुलाई...